Monday, May 18, 2009

मैं आया सी किसे होर कम

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मैं आया सी किसे होर कम,
ते मैं किता कोई होर
शामां पई घबराईंदा,
हुण कित्थों होणी भोर
बन्दर वांग दिमाग,
एनू सुझे ना कुछ होर
फिरदा वांग बम्बीरी,
ते कोई इक ना एदी डोर
झुठे प्यार दी पींगां,
ते उडदा सारी और
बिख्यां दे विच रम्या,
मेरा हर इक कल्ला पोर
कित्थे पाइये सारे सुख,
जेडे हर वेले नाल जाण
ते कित्थों पावां मुल साचा,
और बडाई मान
एह दुनिया जिस्दी दात है लेंदी,
ते मंगण लग्गी होर
मेरे अंदर सी लुक्केया,
एहो सां लोभी चोर
किसे ने मान नियो दितेया,
ते पायी इन्नी सोझी
हुण चार वी ना लब्ब्ण,
जिनां चुक्णी मेरी बोझी
होंदा माडा सी मैं,
ते होया वदों मैला
कित्या कम ना एको,
जेडा होण्दा सब तों पेहलां
लब्बेया जीनू मन्दिरां,
टोबेयां ते मज़ारां
चूक गया इस जनमों,
हुण कित्थे मत्था मारां
कित वल पाइये लंगर,
सफर तूफानी होया
कूड दुनिया दे विच,
मैं चेत रूहानी खोया
मेरे सम होणे किन्ने,
चौरासी जून भुग्ताण
बिन मोहर लग्गे आंवदे,
बिनां मोहर दे जाण
साडी जे होंदी जे चिट्ठियां,
ते कोई लांदा मोहर
डाकिये ने नइयो सद्देया,
ते हुण जाइये केडी और
मैं दिहाडे कम ना कित्तेया,
ते लब्बेया नाहीं दीप
हुण चेत किदां होईये,
जब जम दीखे समीप
पावां तरले किस्दे,
जेडा पास बुलावे
बक्श के गरीब नूं,
गल्ल इश्के दी पल्ले पावे
जिस्दे नाल होन्देयां,
मैं भुलां मत्त बिबेक
पावें इक्को करेयां,
पर होवे कम ओ नेक
तेरा भाणा मीठा ते,
कथनी कही ना जावे
मेरे उत्ते मेहर कर,
एह् कारावास ना भावे
पा प्यार तेरे दीयां पींगां,
साच्चा जेडा रंग
तेनू हुण बिसार के,
नईयो चलणा बाकियां दे ढंग
मेरे सज्जण सुहेले आन मिलो,
देना भ्क्ती दान
औगणहार नूं बक्शिये,
और ना मंगदे प्राण
औगणहार नूं बक्शिये,
और ना मंगदे प्राण ।


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At your lotus feet,
begging for mercy and love !
- N


Thursday, April 16, 2009

कुछ और बातें....

2 comments
कुछ और बातें....
...... अक्षरक्ष: ।

(1)
बुज़ुर्गों से सीखा बडे होने का सबब,
लोगों ने सिखा डाला दुनियादारी का ताव,
कोइ दिलबर भी मिले तो इश्क जागे दिल में ।

(2)
पीहर के दिन सदा ना रहते, दुलहन तो ससुराल ही जाय,
मां बाबा संग बडी निभाई, अब पीया को जाय रिझाय,
कोई बता रहा था कि मेरी उम्र-ए-निकाह बीत गई ।

(3)
दिल में गर इक सनम का प्यार ना बसे तो ठीक,
दूसरे को देखो गर आखों में इक ना बसे तो ठीक,
अजीब सा है ये चलन, रोज़ खुदा बदलते देखे मैंने ।

(4)
लोग यूं मरते रहे काफिलों के साथ में,
और कई चल बसे, ख्वाहिशों के साथ में,
मर गई हर ख्वाहिश, जब तू मेरा हासिल बना ।

(5)
दस्तूर तेरे महखाने का, है रहा ये आम,
आखिरी बूंद बाकी तक, चला है दौर-ए-जाम,
सिर्फ पैमाने से नहीं, आखों से भी तूने पिलायी बहुत है ।


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प्यार सहित
- नवीन

मेरे साथी

 

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