Monday, October 8, 2007

आप जी का घर


आपने जब भी याद किया, आ पहुंचे हम इधर
सबसे अच्छा सबसे प्यारा आप जी का घर
हां बाप जी का घर मेरे बाप जी का घर

दुःख तकलीफ सब भूल गये, कहते हैं बीमार वो देखो
इतना प्यार लुटा रहे हैं लाखों सेवादार वो देखो
और कहीं न जाना गवारा, बस आप जी का घर
मेरे सोहनी सूरत वाले बाप जी का घर

हर मकान गली कूचे में, बस आपका ही नूर है
कहीं भी खड़े मिल जाते हो, बात बड़ी मशहूर है
लगता है इक सपना न्यारा, आप जी का घर
हर बच्चे के इकलौते, बाप जी का घर

हवा में प्यार यहां बहे और पानी में जिन्दगी
हर ज़र्रा तेरा नाम कहे, करे शाम सवेरे बन्दगी
मैं भी आपका एक दुलारा, आप जी का घर
सबका जीवन बनाने वाले, बाप जी का घर

हर शख्स करे फरियाद, और बड़ा मजबूर है
आप बताते मंजिल ये झूठी, धाम सच्चा दूर है
दे दो दरस करो उजाला, आया आप जी का घर
पत्थर को पारस करने वाले बाप जी का घर

सबसे अच्छा सबसे प्यारा आप जी का घर
हां बाप जी का घर मेरे बाप जी का घर
sab khsuhnuma chahre aur dastaan-e-aashiqui
aaur saari ye manzilen yaad rahengi hamesha,
hum na rahenge is jahaan mein,
par ye yunhi abaad rahengi hamesha !!
- For My Master

1 comments:

Peter Varma said...

You sound like a great poet. Its in you. You are indeed talented in the same. I look forward to reading more such posts from you. Rgds, Pankaj (Peter) Varma http://petervarma.blogspot.com 91 9810000163 Gurgaon New Delhi India