Friday, December 19, 2008

तू जो ना हुआ मेरे रूबरू


तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा
मुद्दतों बनती बिगड़्ती रही, वही दास्ताँ हो जाऊंगा

तबदील होता रहूंगा मैं आशना-ए-आलमीन में
गुजरा वक्त बन जाऊंगा, हर वक्त खुद को दोहराउंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

आफत मेरे ही लिये, बस मैं ही दुनिया पर मरूं
इस दफा इल्जाम बेवफाई का लगे, तो खुशनुमा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

हर इल्तिजा सुन ले मेरी, हर बात का जवाब दे
जो तेरे पांव बढ़ के चूम लूं, क्या दूजा खुदा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

कई और तेरे करीब थे, कई और आयेंगे अभी
मैं जो अब आदम जात हूं, तुझ से ना मिला तो खो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

तेरे हुक्म की तामील हो, हर एक आती सांस में
तू ना रहे मझ में अगर, बेनूर-ओ-मुर्दा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

मीठी जुबां खंजर बगल में, दुनिया इसी का नाम है
तेरी रहमत सब फिर पा रहे, तो मैं ही क्यों रुसवा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

इक शख्स है पशे-आईना, जिसे देख कर हूं खौफजदा
तू दिखा दे मेरा असल आज, तो मैं हक शुदा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

गुनाह मेरे माफ कर, मुझे अपनी नजर से पाक कर
जिया बहुत कुछ और बन कर, अब तेरा बंदा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

मंजूर हर एक शर्त और कोई तेरी ताकीद है
सुखनवर जो मेरा तू रहे, तो इफ्फतजदा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

ना रुला इस गलीज को, ना मौत से नवाज अब
ऐशों-इशरत आलम को दे, मैं ज़र्रा-ए-कूचा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

रहें कायम यूं ही ऐबों-हरम सभी दुनिया के वास्ते
गरीब नवाज दे वो नजर, कि मैं तुझ में ही खो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा

तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा
मुद्दतों बनती बिगड़्ती रही, वही दास्ताँ हो जाऊंगा
------------------------------
My Dear Master
begging for your love
- N

1 comments:

परमजीत बाली said...

बहुत ही बेहतरीन और उम्दा लिखा है।बहुत बढिया लगा पढ कर।बधाई स्वीकारें।

मीठी जुबां खंजर बगल में, दुनिया इसी का नाम है
तेरी रहमत सब फिर पा रहे, तो मैं ही क्यों रुसवा हो जाऊंगा
तू जो ना हुआ मेरे रूबरू, तो मैं खुद फ़ना हो जाऊंगा