Tuesday, January 13, 2009

हाल मुरीदां दा

हाल मुरीदां दा

[1]

मिलदी होवे तेरे प्यार दी दात रात दिन
ते की करने ने दुनिया दे जज्बात रात दिन ?


*******************************************************

[2]

तेरे दीदार से रूह यूं मेरी नम रहे

कि दुनिया में रहे नवीन पर कम रहे |

खत्म करने का क्या हो किसी जानिब से

तुझ से बिछड़ने का रहे जो गम रहे |



-----------------------------------------

Dear Master

I am lying in pain, come and show me your face again

Regards

- N


2 comments:

मुकेश कुमार तिवारी said...

नवीन जी,

मेरी कविता "लड़कियाँ तितली सी होती हैं (नई कड़ी) पर टिप्पणी का शुक्रिया. और जो बात मुझे छू गयी वो थी प्रत्युत्तर में आपकी एक बेहतरीन कविता. सचमुच लड़कियाँ ऐसी ही होती हैं.

धन्यवाद.

मुकेश कुमार तिवारी

मुकेश कुमार तिवारी said...

नवीन,

यदि कोई उलझन ना हो तो अपना मोबाईल नम्बर जरूर दीजियेगा. जब कभी फरीदाबाद आया तो मुलाकात होगी.

मुकेश कुमार तिवारी
+919425065115