हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
उसूलवार कहने लगे, हमें जीने का ढंग नहीं
आज कसम खायी हर रोज मरने की
दिल में उतरनें कुछ कर गुजरने की
आओ तुम भी देख लो वो किसके संग नहीं
हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
लेते रहो मजे तुम, दुनिया की सैर के
डूबे रहो, हो क़ुर्बान प्यार में गैर के
हमको तो उसने थाम लिया, अब ये रही टूटी पतंग नहीं
हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
अपने ही बनाये मंदिर काबे पूजते रहो
लेकर तलवारें डंडे उसको ढूँढ़ते रहो
पनाह ली है उसने दिल में, पूछो हुआ कितना तंग नहीं
हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
रोज हमने मौत का इंतज़ाम कर लिया
बदी छोड़ कर नेकी से हमाम भर लिया
मरना है इसमें बारंबार कोई होगी जंग नहीं
हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
बनाओ उसे रहबर जो ले जायेगा तुम को पार
नजर-ए-करम से उसकी आओगे ना बार बार
बनाओ घर जहां दिमाग की जाती तरंग नहीं
हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
हर रंग बेमाना सा लगे, अगर उसका रंग नहीं
उसूलवार कहने लगे, हमें जीने का ढंग नहीं
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Be Colored in HIS Love
Naveen
4 comments:
Wah .. Kya baat hai..!! Apke shabdo ne baya kiye rango ka kamal hai!
... bahut khoob !!!
Baithe hein uski rehmat ke bharose, woh humein bhi panah de
Meri galti ko najarandaj karke, woh apna dham de
Chahate marne ki rakhte to hain lekin itna dum nahi
Har rang bemana sa lage, agar uska rang nahi
"Ye masjid hai ye butkhana,matlab to hai dilko samajhana..chahe ye mano chahe wo mano"...puranee qawwalee yaad dila dee...!
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