Sunday, January 17, 2010

दिल में शोर बहुत है

कभी आओ मिलें बातें करें
लब ना खोलना, दिल में शोर बहुत है

दर्द पर हरियाली हर-सू छायी है यहां
सुना ही था कि मोहब्बत में जोर बहुत है
बस यूं ही बैठना, दिल में शोर बहुत है

कई बार समाया और दिल से फेंका गया हूं
दुनिया के रिश्तों की, कच्ची डोर बहुत है
ज़ुबां को तकलीफ मत देना, दिल में शोर बहुत है

ज़माने हुए होश गंवाये हुए हम को
सिर्फ तेरी निगाह ही पिलाती थी ऐसे, चोर बहुत है
देखो किसी से ना कहना, दिल में शोर बहुत है

निगाहों में और कोई जंचता नहीं अब
जादू है तेरा, चारों और बहुत है
अब तो मान जाओ, दिल में शोर बहुत है

चले आओ ना, दिल में शोर बहुत है

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Looking for eternal peace.....
........at your Lotus Feet !

3 comments:

vimi said...

bina lab khole doston se hi baat ho sakti hai........ aur dil ka shor "baat" se nahin "saath" se hi shaant hota hai.....hai na ????

नवीन शर्मा said...

hehehe ... sahi keh rahi ho aap. tabhi to keh raha hun apne 'dost' ko.. ki bas chale aao !

श्याम कोरी 'उदय' said...

... bahut sundar !!!!